अनजान आगे का सफ़र , बूढ़ा हुआ है यह शज़र इससे जिनको छाँव मिले, उनसे ही कई घाव मिले। अनजान आगे का सफ़र , बूढ़ा हुआ है यह शज़र इससे जिनको छाँव मिले, उनसे ही कई ...
यार क्या बचपना था वो भी, यार क्या बचपना था वो भी,
दोस्तों को चिढ़ाना, उन्हें खेल में चुनौती देना, और फिर उनकी गलतियां निकालना, सुबह स्कूल में... दोस्तों को चिढ़ाना, उन्हें खेल में चुनौती देना, और फिर उनकी गलतियां निकालन...
रुकना कभी सिखाया ही नहीं, माँ और बाबूजी ने। रुकना कभी सिखाया ही नहीं, माँ और बाबूजी ने।
लिखना है बचपन से बड़ा होने तक का सफर लिखना है बचपन से बड़ा होने तक का सफर
हम सबके बचपन का साथी है यह , दुख और सुख का हमारे जुड़ा है इससे नाता , बरगद की छांव और हम सबके बचपन का साथी है यह , दुख और सुख का हमारे जुड़ा है इससे नाता , बरगद ...